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CrimeJharkhand News Desk

ज़्यादा रिटर्न का लालच देकर एक CRPF जवान के साथ ₹24 लाख की धोखाधड़ी की गई; उसके आत्महत्या में साथी हवलदार समेत 3 लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई।

ज़्यादा रिटर्न का लालच देकर एक CRPF जवान के साथ ₹24 लाख की धोखाधड़ी की गई; उसके आत्महत्या में साथी हवलदार समेत 3 लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई।

रांचीः शहर के धुर्वा स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सीटीसी (टी एंड आईटी) कैंप में तैनात हवलदार भुवनेश्वर पाल की संदिग्ध आत्महत्या के मामले में वित्तीय धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है।

विभागीय जांच में आरोप लगा है कि 60 फीसदी सालाना मुनाफे का लालच देकर भुवनेश्वर पाल से करीब 24 लाख रुपये एक कंपनी में निवेश कराए गए थे. इस रकम की व्यवस्था करने के लिए जवान ने 15 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था, जबकि करीब 9.8 लाख रुपये अपने भविष्य निधि (पीएफ) खाते से निकाले थे. बाद में रकम वापस नहीं मिलने और आर्थिक दबाव के बीच 27 सितंबर 2026 को जवान की अपने ही राइफल से चली गोली से मौत हो गई।.

एफआईआर दर्ज हुआ

इस मामले में सीटीसी के उप प्राचार्य बृजेश कुमार दुबे की लिखित शिकायत पर रांची के विधानसभा थाना में 13 अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई है. एफआईआर में हवलदार योगेश चन्द्र उरांव, उसकी पत्नी पूनम कुमारी और मैसर्स रीपार्कल कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ रोशन उरांव को आरोपित किया गया है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(2), 318(4), 319(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

60 फीसदी सालाना मुनाफे का दिया था लालच

एफआईआर के अनुसार, सीटीसी कैंप में तैनात हवलदार योगेश चन्द्र उरांव पर आरोप है कि उसने भुवनेश्वर पाल को लालगुटवा, नगड़ी स्थित मैसर्स रीपार्कल कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था. जवान को निवेश पर सालाना 60 फीसदी तक मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया गया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि योगेश उन जवानों को निशाना बनाता था, जिन्हें वित्तीय निवेश के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी. कंपनी के संस्थापक और सीईओ रोशन उरांव के माध्यम से निवेश की यह व्यवस्था कराई गई थी. इतना अधिक मुनाफा मिलने के भरोसे में आकर भुवनेश्वर पाल ने अपनी जमा पूंजी के साथ कर्ज की रकम भी लगा दी. बाद में यही निवेश उनके लिए भारी आर्थिक संकट का कारण बन गया, आरोप है कि इसी वजह से पाल ने आत्महत्या कर ली।

कंपनी के खाते में 15 लाख, पत्नी के खाते में नौ लाख

इस मामले का सबसे अहम पहलू रकम के ट्रांसफर से जुड़ा है. शिकायत में बताया गया है कि भुवनेश्वर पाल ने कुल करीब 24 लाख रुपये निवेश किए थे. इसमें 15 लाख रुपये कंपनी के सीईओ रोशन उरांव के खाते में और नौ लाख रुपये हवलदार योगेश चन्द्र उरांव की पत्नी पूनम कुमारी के खाते में भेजे गए थे।

पूनम कुमारी झारखंड सरकार में शिक्षिका के पद पर कार्यरत बताई गयी हैं. शिकायतकर्ता ने उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि जवान से ली गई रकम का एक बड़ा हिस्सा उनके खाते में ट्रांसफर होने का आरोप है. पुलिस अब यह जांच करेगी कि रकम किस उद्देश्य से ली गई, उसका इस्तेमाल कहां हुआ और इसमें प्रत्येक आरोपित की क्या भूमिका थी।.

जांच शुरू होते ही कैंप से गायब हुआ आरोपी हवलदार

शिकायत के मुताबिक, मामले की विभागीय जांच तेज होने के बाद हवलदार योगेश चन्द्र उरांव 3 अक्टूबर 2026 को अपने ममेरे भाई जीतवाहन उरांव के साथ कैंप से निकला था. इसके बाद 4 अक्टूबर से वह बिना किसी सूचना के कैंप से अनुपस्थित है. इस घटनाक्रम को लेकर भी जांच की जा रही है. शिकायत में योगेश के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

विधानसभा थाना में दर्ज हुई प्राथमिकी

सीटीसी के उप प्राचार्य बृजेश कुमार दुबे ने विधानसभा थाने में लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच और आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है. एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की चार धाराएं लगाई गयी हैं. मामले के अनुसंधान की जिम्मेदारी पुलिस अवर निरीक्षक दिनेश कुमार को सौंपी गई है. भुवनेश्वर पाल की मौत और उससे पहले हुए कथित वित्तीय लेन-देन ने सीआरपीएफ कैंप में जवानों के बीच निवेश के नाम पर होने वाले लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच पर सबकी नजर है।.

27 सितंबर को हुई थी मौत

सीआरपीएफ के सीटीसी (टी एंड आईटी), धुर्वा कैंप में तैनात हवलदार भुवनेश्वर पाल की मौत 27 सितंबर 2026 को ऑन-ड्यूटी के दौरान हुई थी. घटना के समय उनकी सर्विस राइफल से गोली चली थी, जो उनके गले में लगी. गोली लगने के बाद अत्यधिक खून बहने से घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई थी।.

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