कोर्ट ने माना कि पति पत्नी के खिलाफ न तो क्रूरता के आरोप साबित कर सका और न ही ऐसी मानसिक बीमारी का प्रमाण दे पाया, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार बन सके। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पति की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।