रांची: देश के 10 टॉप जिला अस्पतालों में जगह बना चुका रांची के सदर अस्पताल कई गंभीर बीमारियों के गुणवत्तापूर्ण इलाज की वजह से अक्सर वाहवाही बटोरता रहा है. यहां ब्लड डिसऑर्डर की गंभीर बीमारियों से लेकर कई तरह का कैंसर, किडनी, लिवर, दिल की बीमारियों तक के इलाज की व्यवस्था है. अब आगे कैथलैब और बोन मैरो ट्रांसप्लांट तक की योजना पर आगे बढ़ रहा है.इस असप्ताल में आयुष्मान मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों को 15 लाख तक का इलाज भी मुफ्त होता है. लेकिन इतनी व्यवस्था वाले इस टॉप रैंक सदर अस्पताल में ब्लड डिसऑर्डर के मरीजों को कीमो और अन्य दवाओं के बाद बेहद जरूरी प्लेटलेट्स की व्यवस्था बाहर से करना पड़ता है. जबकि नियम यह कहता है कि आयुष्मान के तहत मरीजों को अगर बाहर से दवा या ब्लड-प्लेटलेट्स मंगाना पड़े तो उसकी व्यवस्था भी अस्पताल को करना होगा700 से 820 रुपये में खरीदना पड़ता है एक यूनिट प्लेटलेट्ससदर अस्पताल में अप्लास्टिक एनीमिया के इलाजरत मरीज के परिजन जुनैद और टेकलाल कहते हैं कि उनके परिजन अप्लास्टिक एनीमिया के मरीज हैं. उन्हें दवा (कीमो) चढ़ाने के बाद 4 यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाना पड़ता है. लेकिन अस्पताल की ओर से प्लेटलेट्स नहीं मिलता है. इसलिए राजधानी के दूसरे निजी अस्पतालों के ब्लड बैंक से प्लेटलेट्स खरीदना पड़ता मरीज के परिजन जुनैद बताते हैं कि राज हॉस्पिटल से 700 रुपये में और आर्किड हॉस्पिटल, हेल्थ पॉइंट्स से 820 रुपये में प्लेटलेट्स खरीदते हैं. वहीं दूसरे मरीज के परिजन टेकलाल कहते हैं कि वे बेहद गरीब परिवार से आते हैं. इसलिए लगातार चार-चार यूनिट प्लेटलेट्स की व्यवस्था करना उनके लिए बहुत मुश्किल से हो पाता है.
बाहर से प्लेटलेट्स खरीदना पड़ रहा है इसकी जानकारी नहीं: उपाधीक्षकइस मामले को लेकर ईटीवी भारत की टीम रांची सदर अस्पताल के उपाधीक्षक से बात की. इस दौरान उपाधीक्षक डॉ बिमलेश कुमार सिंह ने कहा कि अस्पताल में जो मरीज ब्लड डिसऑर्डर के हैं, उन्हें ब्लड प्लेटलेट्स की व्यवस्था अस्पताल से ही की जाती है. परिजन द्वारा बाहर से प्लेटलेट्स लाने की सवाल पर कहा कि इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. अगर मरीज बाहर से लाते हैं तो इसकी जांच करवाने की बात कही है.
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