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RamgarhTribalJharkhand News Desk

अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 (IYWF) एवं महिला किसान दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर कृषक-वैज्ञानिक अंतर्मिलन कार्यक्रम आयोजित

अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 (IYWF) एवं महिला किसान दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर कृषक-वैज्ञानिक अंतर्मिलन कार्यक्रम आयोजित

रामगढ़, 15 अक्टूबर 2026। अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 (IYWF) एवं महिला किसान दिवस 2026 के उपलक्ष्य पर गुरुवार को रामगढ़ समाहरणालय स्थित ब्लॉक-बी सभागार में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), रामगढ़ के तत्वावधान में कृषक-वैज्ञानिक अंतर्मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों से लगभग 70 महिला कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला कृषकों को आधुनिक कृषि तकनीकों, विभागीय योजनाओं, फसल प्रबंधन तथा कृषि क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के अवसरों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती दीपा प्रियंका, डीडीएम, नाबार्ड द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उप परियोजना निदेशक, आत्मा रामगढ़ श्री संजय कुमार मंडल, दुलमी प्रखंड की प्रखंड तकनीकी प्रबंधक सुश्री अनुपमा टोपनो, मांडू प्रखंड की प्रखंड कृषि पदाधिकारी श्रीमती विनिता सिंह, पतरातू प्रखंड की प्रखंड तकनीकी प्रबंधक सुश्री कनुप्रिया कुमारी, चितरपुर की सहायक तकनीकी प्रबंधक सुश्री अनामिका टेटे, सहायक तकनीकी प्रबंधक श्रीमती अर्पणा शर्मा, रामगढ़ प्रखंड की सहायक तकनीकी प्रबंधक श्रीमती स्मृति टुटी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती दीपा प्रियंका, डीडीएम, नाबार्ड ने नाबार्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कृषि क्षेत्र में नए उद्योग एवं कृषि आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund—AIF) के अंतर्गत उपलब्ध सहायता तथा इससे जुड़ी संभावनाओं के बारे में महिला कृषकों को अवगत कराया। उन्होंने कृषकों को कृषि को आय के बेहतर स्रोत के रूप में विकसित करने तथा आधुनिक कृषि अवसंरचना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

उप परियोजना निदेशक, आत्मा रामगढ़ श्री संजय कुमार मंडल ने खरीफ फसलों के उचित प्रबंधन, फसलों में लगने वाले रोग-व्याधियों की पहचान एवं उनके नियंत्रण के उपायों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने रबी फसलों की समय पर बुवाई एवं वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषि कार्यों को निर्धारित समय एवं वैज्ञानिक पद्धति के अनुसार करना आवश्यक है।

श्री मंडल ने महिला कृषकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए बीजोपचार के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसी भी फसल की बुवाई से पहले बीज का उचित उपचार करना अत्यंत आवश्यक है। बीजोपचार से बीज एवं मृदा जनित रोगों के प्रकोप को कम करने में सहायता मिलती है, जिससे फसल की अच्छी शुरुआत और बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ती है। उन्होंने कृषकों को फसल की आवश्यकता के अनुसार अनुशंसित कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

दुलमी प्रखंड की प्रखंड तकनीकी प्रबंधक श्रीमती अनुपमा टोपनो ने आत्मा के माध्यम से संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कृषि प्रसार गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं, मांडू प्रखंड की प्रखंड कृषि पदाधिकारी श्रीमती विनिता सिंह ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तारपूर्वक बताया तथा महिला कृषकों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के दौरान महिला कृषकों को अपनी कृषि संबंधी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखने का अवसर मिला। कृषक-वैज्ञानिक अंतर्मिलन के माध्यम से कृषकों और कृषि विभाग के पदाधिकारियों के बीच संवाद स्थापित हुआ। कार्यक्रम में महिला कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही। इस आयोजन के माध्यम से महिला किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने, फसल उत्पादन बढ़ाने तथा कृषि आधारित आजीविका को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया गयाl

कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों की उत्कृष्ट महिला कृषकों को कृषि क्षेत्र में उनके योगदान एवं उपलब्धियों के लिए शॉल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली महिला कृषकों में दुलमी प्रखंड के ग्राम बहातू, पंचायत जमीरा की श्रीमती पायल परवीन; मांडू प्रखंड के ग्राम ओरला, पंचायत ओरला की श्रीमती रीना देवी; गोला प्रखंड के ग्राम सरला कला, पंचायत संग्रामपुर की श्रीमती सुनीता कुमारी; पतरातू प्रखंड के ग्राम गेगदा, पंचायत लबगा की श्रीमती मनी देवी तथा चितरपुर प्रखंड के ग्राम एवं पंचायत मायल की श्रीमती सुरभि कुमारी शामिल थीं।

इन महिला कृषकों को सम्मानित करने का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचान देना, उनके कार्यों को प्रोत्साहित करना तथा अन्य महिला कृषकों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम का समापन महिला कृषकों को कृषि की नवीन तकनीकों को अपनाने तथा कृषि एवं कृषि आधारित उद्यमों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के लिए प्रोत्साहित करने के संदेश के साथ हुआ।

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