रांची: झारखंड में स्कूल से बाहर रह गए और पढ़ाई बीच में छोड़ चुके बच्चों की पहचान के लिए शिशु पंजी अद्यतन करने की तैयारी शुरू हो गई है, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस कार्य के तहत सरकारी स्कूलों को उनके आसपास के गांवों और टोलों से जोड़ा जाएगा. इसके बाद शिक्षकों को संबंधित गांवों और टोलों के घरों का सर्वे करने की जिम्मेदारी दी जाएगी. इस सर्वे के माध्यम से 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों की संख्या, स्कूलों में नामांकन और अनामांकित बच्चों से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों, जिला शिक्षा अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किया है. निर्देश में कहा गया है कि शिशु पंजी अद्यतन करने से पहले डहर पोर्टल पर स्कूलों के साथ गांवों और टोलों की मैपिंग की जाए. इसके बाद शिक्षकों को गांव-टोला और घरों से टैग किया जाएगा, ताकि सर्वे का काम व्यवस्थित तरीके से पूरा हो सके।
निर्देश के अनुसार, प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ), अवर विद्यालय निरीक्षक और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी की देखरेख में स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा. गांवों और टोलों को स्कूलों से जोड़ने संबंधी आदेश 14 अक्टूबर 2026 तक जारी करने का निर्देश दिया गया है. वहीं, संबंधित अधिकारियों को 25 अक्टूबर तक सभी स्कूलों को टैगिंग आदेश उपलब्ध कराना होगा।
स्कूलों के प्रधानाध्यापक डहर पोर्टल पर गांवों और टोलों की मैपिंग करेंगे. इसके बाद स्कूल में कार्यरत सरकारी शिक्षकों और सहायक अध्यापकों को संबंधित क्षेत्रों के घरों से जोड़ा जाएगा. शिक्षकों को अपने क्षेत्र के घरों की संख्या का पता लगाकर इसकी जानकारी प्रधानाध्यापक को देनी होगी. प्रधानाध्यापक अपने स्कूल के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों और टोलों के कुल घरों की संख्या पोर्टल पर दर्ज करेंगे।
सर्वे के दौरान यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी गांव, टोले या घर को एक से अधिक स्कूलों के साथ नहीं जोड़ा जाए. किसी भी घर का दोबारा सर्वे नहीं होना चाहिए और कोई घर सर्वे से छूटना भी नहीं चाहिए. स्कूलों के साथ गांवों और टोलों का निर्धारण केवल निर्धारित स्कूल क्षेत्र के आधार पर नहीं, बल्कि घरों की संख्या और उपलब्ध शिक्षकों की संख्या को ध्यान में रखकर किया जाएगा. एकल शिक्षक वाले स्कूलों को कम संख्या में टोले और परिवार आवंटित करने का निर्देश दिया गया है।
पिछले वित्तीय वर्ष की मैपिंग रिपोर्ट को डहर पोर्टल पर कॉपी किया जाएगा. यदि इस साल किसी स्कूल के अंतर्गत गांवों या टोलों की संख्या में बदलाव हुआ है, तो उसे संशोधित कर फ्रीज करना होगा. शिक्षकों के स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति या नई नियुक्ति होने की स्थिति में भी मैपिंग में जरूरी बदलाव करना होगा.
शिशु पंजी सर्वे में सरकारी स्कूलों के साथ गैर-सरकारी सहायता प्राप्त, अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त, संस्कृत और मदरसा विद्यालयों के शिक्षकों की भी मदद ली जाएगी. संबंधित स्कूलों को सरकारी स्कूलों के साथ टैग किया जाएगा. इसके बाद शिक्षकों के बीच घरों की संख्या का बंटवारा किया जाएगा, ताकि सर्वे का काम समय पर पूरा हो सके।
निर्देश के मुताबिक, शिक्षकों की टैगिंग संबंधी रिपोर्ट डहर पोर्टल पर अपलोड कर 7 नवंबर 2026 तक फ्रीज करनी होगी. शिशु पंजी अद्यतन का संभावित कार्यारंभ 10 नवंबर 2026 निर्धारित किया गया है. इसका उद्देश्य स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान करना और यह सुनिश्चित करना है कि 3 से 18 वर्ष तक के बच्चे शिक्षा से वंचित न रहे।
शिशु पंजी संकलन रिपोर्ट 2025-26 के राज्यस्तरीय आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कुल 29,995 बच्चे स्कूल से बाहर चिह्नित किए गए थे. इनमें 16,375 लड़के, 13,615 लड़कियां और पांच ट्रांसजेंडर बच्चे शामिल थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग में 10,133 बच्चे स्कूल से बाहर थे. वहीं, 6 से 14 वर्ष के आयु वर्ग में यह संख्या 11,638 दर्ज की गई. इस आयु वर्ग में 6 से 10 वर्ष के 5,859 और 11 से 14 वर्ष के 5,779 बच्चे शामिल थे। इसके अलावा, 15 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में 8,224 बच्चे स्कूल से बाहर पाए गए। इनमें 15 से 16 वर्ष के 4,451 और 17 से 18 वर्ष के 3,773 बच्चे थे।
राज्यस्तरीय रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025-26 में झारखंड के 24 जिलों, 266 प्रखंडों और 2,827 संकुलों में शिशु पंजी से संबंधित आंकड़े संकलित किए गए थे. राज्य में कुल 38,608 गांव, 1,01,636 इलाके और 54,44,867 परिवार दर्ज किए गए थे. अब वित्तीय वर्ष 2026-27 में होने वाले सर्वे से स्कूल से बाहर बच्चों की नई संख्या सामने आएगी. इसके आधार पर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।