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SimdegaTribalJharkhand News Desk

सफलता की कहानी ग्राम-सभा की एकजुटता से सूखी नहर में लौटा पानी

सफलता की कहानी ग्राम-सभा की एकजुटता से सूखी नहर में लौटा पानी

स्थान: प्रखंड – सिकरियातांड (गिराघाघ), प्रखंड - पाकरटांड, जिला - सिमडेगा (झारखंड)

सहयोगी संस्था: PHIA फाउंडेशन (सिक्रियातांड)

मुख्य सूत्रधार: जॉन डुंग-डुंग एवं ग्राम सभा के सभी सदस्य

1. पृष्ठभूमि और समस्या 

सिमडेगा जिले के पाकरटांड प्रखंड के एक गाँव सिकरियातांड (गिराघाघ) में सिंचाई का मुख्य स्रोत कान्सजोर जलाशय से निकली सरकारी नहर को सिंचाई विभाग के कर्मचारियों द्वारा मनमाने ढंग से छोटे आउटलेट (सी. एच. नंबर 5.9) को दिनांक 14.10.2025 को खराब होने की वजह बताकर बंद कर दिया गया था। ग्रामीणों के व्यक्तिगत प्रयासों के बावजूद अधिकारियों ने इसे "ऊपर का आदेश" बताकर खोलने से मना कर दिया।

प्रभाव:

  • 52 परिवारों की आजीविका पर सीधा खतरा।
  • सैकड़ों एकड़ भूमि पर लगा आलू, गोभी और अन्य सब्जियों की फसलें पानी के अभाव में सूखने की कगार पर थीं।
  • ग्रामीणों में निराशा और प्रशासन के प्रति अविश्वास का माहौल।

2. हस्तक्षेप और रणनीति

जब व्यक्तिगत बातचीत विफल रही, तब PHIA फाउंडेशन के जॉन डुंग-डुंग ने ग्राम सभा के संवैधानिक महत्व तथा उनके अधिकारों और ताकत को समझाने में सफलता प्राप्त किये हालांकि यह काम पूर्व से ही स्थानीय स्वशासन परियोजना के तहत किया जा रहा था किन्तु इसके परिणामों को देखना व्यावहारिक रूप से गाँव वालों के लिए नया अनुभव था I

  • प्रथम चरण (ग्राम सभा का आयोजन): ग्रामीणों को एकजुट कर पहली बैठक दिनांक 20.10.2025 को की गई। इसमें सामूहिक निर्णय लेकर जिला सिंचाई अभियंता (सिमडेगा) को औपचारिक पत्र लिखा गया। इसकी प्रतियां उपायुक्त (DC) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को भी दी गईं ताकि मामला संज्ञान में रहे।
  • द्वितीय चरण (निरंतर पैरवी): विभाग द्वारा आश्वासन के बाद भी जब 20-25 दिनों तक कार्रवाई नहीं हुई, तो दूसरी बार एक माह बाद ग्राम सभा दिनांक 21.11.2025 को आयोजित की गई।

तृतीय चरण (प्रशासनिक दबाव): लगभग 15 ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व में दिए गए पत्र की 'पावती' (Acknowledge Copy) के साथ दिनांक 25.11.2025 को BDO से मुलाकात की । ठोस साक्ष्यों के आधार पर BDO ने तत्काल सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को फ़ोन के माध्यम से फटकार लगाई।3. परिणाम और समाधान

प्रशासनिक सक्रियता के बाद जिला सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ने स्वयं स्थल निरीक्षण किया । मौके पर ही समस्या का निराकरण करते हुए नहर के आउटलेट खुलवाए तथा और मरम्मति का आश्वाशन भी दिया।

उपलब्धियां:

  • उसी दिन से खेतों में पानी पहुंचना शुरू हुआ।
  • वर्तमान में धान, मडुआ और सब्जियों की फसलें लहलहा रही हैं।
  • 52 परिवारों की आर्थिक स्थिति सुरक्षित हुई।

4. प्रभाव और सीख

इस सफल हस्तक्षेप ने गाँव में दूरगामी परिवर्तन किए हैं:

  • आत्मविश्वास में वृद्धि: ग्रामीणों को यह विश्वास हुआ कि संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना परिणाम देता है।ग्राम सभा का सुदृढ़ीकरण: ग्रामीण अब ग्राम सभा को सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि समस्या निवारण का सबसे बड़ा मंच मानते हैं।संस्था के प्रति सम्मान: PHIA फाउंडेशन और जॉन डुंग-डुंग के मार्गदर्शन की सराहना की जा रही है, क्योंकि उन्होंने ग्रामीणों को "रास्ता दिखाने" का काम किया।

निष्कर्ष

यह मामला साबित करता है कि जब 'लोकशक्ति' (ग्राम सभा) और 'संस्थागत मार्गदर्शन' एक साथ मिलते हैं, तो सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाया जा सकता है। यह अन्य गाँवों के लिए भी एक मॉडल है।

ग्रामीणों के खेत
ग्रामीणों के खेत

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