खूंटीः झारखंड के खूंटी जिले में सक्रिय अंतरराज्यीय मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस की विशेष टीम ने दिल्ली और जयपुर में कार्रवाई करते हुए घरेलू काम के नाम पर फंसाई गई चार युवतियों को सकुशल रेस्क्यू किया है. इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा एक ऐसी युवती को लेकर हुआ, जिसे महज नौ साल की उम्र में कथित तौर पर बेच दिया गया था. करीब दस साल बाद आधार कार्ड के सत्यापन के दौरान उसके बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद पुलिस उसे खोजने में सफल रही.
आधार कार्ड के सत्यापन से खुला 10 साल पुराना मामला
पुलिस जांच में सामने आया कि खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड क्षेत्र की रहने वाली इस युवती को बचपन में ही दूसरे राज्य में भेज दिया गया था. उस समय उसकी उम्र महज नौ साल थी. अब वह 19 वर्ष की हो चुकी है. आरोप है कि तस्करी के बाद उसकी शादी भी करा दी गई थी.
तस्करों को भेजा गया जेल
इस पुराने मामले का खुलासा तब हुआ, जब युवती का नया आधार कार्ड बनवाया जा रहा था. यूआईडीएआई की सत्यापन प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध डेटा का मिलान उसके पैतृक गांव और पुराने मोबाइल नंबर से हुआ. इसके बाद पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाया और उसे बरामद कर लिया. इस मामले में संलिप्त तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है.
दिल्ली-जयपुर में कार्रवाई, तीन अन्य युवतियां भी मुक्त
खूंटी के एसपी ऋषभ गर्ग ने बताया कि महिला थाना प्रभारी और हातू थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर चार युवतियों का रेस्क्यू किया है. इनमें लंबे समय से लापता युवतियां भी शामिल हैं, जिन्हें दूसरे राज्यों में घरेलू काम के नाम पर रखा गया था.
एसपी के अनुसार, पिछले वर्ष दर्ज प्राथमिकी के आधार पर करीब 11 वर्षों से लापता एक युवती को बरामद किया गया. वहीं, एक सप्ताह पहले दर्ज शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक साल से लापता दो बच्चियों को भी मुक्त कराया गया. इसके अलावा, खुफिया सूचना के आधार पर घरेलू काम में फंसी चौथी युवती को भी सुरक्षित निकाला गया.
पुलिस अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी
पुलिस के मुताबिक, मानव तस्करी की शिकार युवतियों से महानगरों में घरेलू काम कराया जा रहा था. कई मामलों में उनकी स्थिति बंधुआ मजदूरों जैसी थी. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और पुराने मामलों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.
एसपी ऋषभ गर्ग ने अभिभावकों से अपील की कि यदि कोई बच्चा या बच्ची लापता हो जाता है, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें. शिकायत दर्ज कराने में देरी होने से तस्करों को साक्ष्य मिटाने और पीड़ितों को दूसरे स्थानों पर ले जाने का मौका मिल सकता है, जिससे उनकी बरामदगी और जांच में कठिनाई होती है.