झारखंड में सरकारी धन के हिसाब-किताब और वित्तीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य में अंकेक्षण आपत्तियों और लंबित वित्तीय मामलों की राशि घटने के बजाय लगातार बढ़ी है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि के दौरान यह राशि बढ़कर 18,060 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।